मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
गणेशगीता • अध्याय 3 • श्लोक 47
भक्तिमानिन्द्रियजयी तत्परो ज्ञानमाप्नुयात् । लब्ध्वा तत्परमं मोक्षं स्वल्पकालेन यात्यसौ ॥
इन्द्रियों को वश में करने वाला भक्तिमान्, तत्पर पुरुष ही ज्ञान को प्राप्त कर सकता है और ज्ञान प्राप्त होने से थोड़े समय में ही वह मुक्ति को प्राप्त हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें