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गणेशगीता • अध्याय 3 • श्लोक 40
तज्ज्ञेयं पुरुषव्याघ्र प्रश्नेन नतितः सताम् । शुश्रूषया वदिष्यन्ति संतस्तत्त्वविशारदाः ॥
हे पुरुषश्रेष्ठ! उस ज्ञानयज्ञ को सत्पुरुषों की सेवा और प्रश्न से प्राप्त करो। तत्त्व को जानने वाले ज्ञानी जन तुम्हें शुश्रूषा से उसको कहेंगे।
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