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गणेशगीता • अध्याय 3 • श्लोक 27
निरीहो निगृहीतात्मा परित्यक्तपरिग्रहः । केवलं वै गृहं कर्माचरन्नायाति पातकम् ॥
जो इच्छारहित, आत्मजित् एवं सम्पूर्ण परिग्रह का परित्याग किये हैं, ऐसे प्राणी यदि घर में रहकर कर्म भी करें तो उन्हें कुछ पातक नहीं लगता।
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