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गणेशगीता • अध्याय 3 • श्लोक 25
कर्मांकुरवियोगेन यः कर्माण्यारभेन्नरः । तत्त्वदर्शननिर्दग्धक्रियमाहुर्बुधा बुधम् ॥
जो कर्मों के अंकुर से रहित अर्थात् संकल्प और कामनारहित कर्म करते हैं, तत्त्व के जानने से उस बुद्धिमान्‌ की सारी क्रियाएँ दग्ध हो जाती हैं, ऐसा पण्डित जन कहते हैं।
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