क्रियायामक्रियाज्ञानमक्रियायां क्रियामतिः ।
यस्य स्यात्स हि मर्त्येऽस्मिँल्लोके मुक्तोऽखिलार्थकृत् ॥
क्रिया में अक्रिया का ज्ञान और अक्रिया में क्रिया की बुद्धि जिसकी होती है, वही इस लोक में सभी कर्मों का करने वाला होकर भी मुक्त हो जाता है।
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