कुर्वन्ति देवताप्रीतिं काङ्क्षन्तः कर्मणां फलम् ।
प्राप्नुबंतीह ते लोके शीघ्रं सिद्धिं हि कर्मजाम् ॥
जो कर्म की फल प्राप्त होने की इच्छा से देवोपासना करते हैं, उन-उन कर्मों के अनुसार उनको शीघ्र सिद्धि प्राप्त होती है।
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