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गणेशगीता • अध्याय 3 • श्लोक 1
श्रीगजानन उवाच- पुरा सर्गादिसमये त्रैगुण्यं त्रितनूरुहम् । निर्माय चैनमवदं विष्णवे योगमुत्तमम् ॥
श्रीगणेशजी बोले - पूर्वकाल में सृष्टि उत्पन्न करने के समय तीन गुणों से युक्त तीन शरीर में रहने वाले उत्तम योग का निर्माण करके मैंने विष्णु से इसका वर्णन किया था।
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