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गणेशगीता • अध्याय 2 • श्लोक 42
यतस्तानि पराण्याहुस्तेभ्यश्च परमं मनः । ततोऽपि हि परा बुद्धिरात्मा बुद्धेः परो मतः ॥
स्थूल देह से इन्द्रियाँ परे हैं, इन्द्रियों से परे मन है, मन से परे बुद्धि है और बुद्धि से परे आत्मा है।
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