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गणेशगीता • अध्याय 2 • श्लोक 41
तस्मान्नियम्य तान्यादौ समनांसि नरो जयेत् । ज्ञानविज्ञानयोः शान्तिकरं पापं मनोभवम् ॥
अतः पहले मन के सहित इन्द्रियों को वश में करके ज्ञान और विज्ञान के नाश करने वाले इस मनोद्भव पापी काम को जीतना चाहिये।
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