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गणेशगीता • अध्याय 2 • श्लोक 38
आवृणोति यथा माया जगद्बाष्पो जलं यथा । वर्षामेघो यथा भानुं तद्वत्कामोऽखिलांश्च रुट् ॥
जिस प्रकार माया जगत्‌ को ढकती है, जैसे भाप जल को और जैसे वर्षाकाल का मेघ सूर्य को ढक लेता है, इसी प्रकार काम ने सबको ढक लिया है।
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