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गणेशगीता • अध्याय 2 • श्लोक 37
श्रीगजानन उवाच- कामक्रोधौ महापापौ गुणद्वयसमुद्भवौ । नयन्तौ वश्यतां लोकान् विद्ध्येतौलोकान् विद्ध्येतौ द्वेषिणौ वरौ ॥३
श्रीगणेशजी बोले - रजोगुण और तमोगुण से उत्पन्न हुए ये काम और क्रोध ही दो महापापी हैं। ये लोगों को अपने वश में करते हैं, इन्हीं दोनों को तुम महान् शत्रु जानो।
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