वरेण्य उवाच-
पुमान्यत्कुरुते पापं स हि केन नियुज्यते ।
अकाङ्क्षन्नपि हेरम्ब प्रेरितः प्रबलादिव ॥३
वरेण्य ने कहा - हे गणेशजी! प्राणी जो पाप करता है, वह किसके द्वारा प्रेरित होता है? इच्छा नहीं करता हुआ भी बलात् किससे प्रेरित होता हुआ वह पापाचरण करता है?
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