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गणेशगीता • अध्याय 2 • श्लोक 34
कामश्चैव तथा क्रोधः खानामर्थेषु जायते । नैतयोर्वश्यतां यायादम्यविध्वंसकौ यतः ॥
कर्मेन्द्रिय और ज्ञानेन्द्रिय के विषयों में काम और क्रोध उत्पन्न होते हैं, इनके वश में नहीं होना चाहिये, कारण कि यही प्राणी के शत्रुरूप हैं।
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