ये चैव नानुतिष्ठन्ति त्वशुभा हतचेतसः ।
ईर्ष्यमाणान्महामूढान्नष्टांस्तान्विद्धि मे रिपून् ॥
जो अज्ञान से चित्त के नष्ट होने के कारण इस मार्ग का अनुष्ठान नहीं करते हैं, उन ईर्ष्यालु, मूर्ख और नष्टबुद्धियों को मेरा शत्रु जानो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।