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गणेशगीता • अध्याय 2 • श्लोक 31
अनीर्ष्यन्तो भक्तिमन्तो ये मयोक्तमिदं शुभम् । अनुतिष्ठन्ति ये सर्वे मुक्तास्तेऽखिलकर्मभिः ॥
ईर्ष्या न करने वाले जो भक्तिमान् मनुष्य मेरे कहे हुए इस शुभ मार्ग का अनुष्ठान करते हैं, वे सब कर्मों से मुक्त हो जाते हैं।
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