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गणेशगीता • अध्याय 2 • श्लोक 3
अनारम्भेण वैधानां निष्क्रियः पुरुषो भवेत् ।भवेत् न सिद्धिं याति संत्यागात्केवलात्कर्मणो नृप ॥
कर्म में आसक्तजन कर्मों के आरम्भ न करने से निष्क्रिय हो जाते हैं। हे राजन्! केवल कर्मों के ही त्याग देने से सिद्धि नहीं होती।
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