मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
गणेशगीता • अध्याय 2 • श्लोक 23
न कुर्वेऽहं यदा कर्म स्वतन्त्रोऽलसभावितः । करिष्यन्ति मम ध्यानं सर्वे वर्णा महामते ॥
हे महामते! यदि मैं आलसी तथा स्वच्छन्द होकर कर्म नं करूँ तो सभी वर्ण कर्म छोड़कर केवल मेरा अनुगमन करने लगेंगे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें