श्रेयान्यत्कुरुते कर्म तत्करोत्यखिलो जनः ।
मनुते यत्प्रमाणं स तदेवानुसरत्यसौ ॥
जो कर्म महान् पुरुष करते हैं, वही कर्म अन्य सब करते हैं, वह जिसको प्रमाण मानते हैं, दूसरे भी उसी को मानते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।