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गणेशगीता • अध्याय 2 • श्लोक 20
परमां सिद्धिमापन्नाः पुरा राजर्षयो द्विजाः । संग्रहाय हि लोकानां तादृशं कर्म चारभेत् ॥
(हे राजन्!] प्राचीन कालमें कर्म करने से बहुत से राजर्षि और ब्रह्मर्षि परमसिद्धि को प्राप्त हुए हैं। लोकसंग्रह के निमित्त ही अनासक्त होकर कर्म करना उचित है।
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