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गणेशगीता • अध्याय 2 • श्लोक 14
ऊर्जो भवन्ति भूतानि देवादन्नस्य संभवः । यज्ञाच्च देवसंभूतिस्तदुत्पत्तिश्च वैधतः ॥
अन्न से ही प्राणी, उत्पन्न होते हैं, अन्न वर्षा से उत्पन्न होता है, वर्षा यज्ञ से उत्पन्न होती है और कर्म से यज्ञ की उत्पत्ति होती है।
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