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गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 9
अकालदेशतोऽपात्रेऽवज्ञया दीयते तु यत् । असत्काराच्च यद्दत्तं तद्दानं तामसं स्मृतम् ॥
जो देश-कालरहित, अपात्र में अवज्ञापूर्वक दिया जाता है और जो दान अपमानपूर्वक दिया जाता है, वह तमोगुणी दान कहा गया है।
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