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गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 6
तदस्थिरं जन्ममृती प्रयच्छति न संशयः । परात्मपीडकं यच्च तपस्तामसमुच्यते ॥
राजसी तप निश्चय ही जन्म-मृत्यु और अस्थिरता को देने वाला है और जिसमें दूसरे को तथा अपने को पीड़ा हो, वह तामस तप कहा गया है।
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