विद्यार्थिनो भवेद्विद्या सुखार्थी सुखमाप्नुयात् ।
कामानन्याँल्लभेत्कामी मुक्तिमन्ते प्रयान्ति ते ॥
इति श्रीमद्गणेशगीतासूपनिषदर्थगर्भासु योगामृतार्थशास्त्रे श्रीगणेशपुराणे उत्तरखण्डे गजाननवरेण्यसंवादे त्रिविधवस्तुविवेकनिरूपणं नाम एकादशोऽध्यायः ॥
॥ इति गणेश गीता समाप्ता ॥
विद्यार्थी को विद्या, सुखार्थी को सुख, कामार्थी को काम की प्राप्ति होती है और अन्त में वे मुक्ति को प्राप्त होते हैं।
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