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गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 51
ददाति तस्य सन्तुष्टो गणेशो भोगमुत्तमम् । पुत्रान्पौत्रान्धनं धान्यं पशुरत्नादिसम्पदः ॥
उस पर सन्तुष्ट होकर गणेशजी पुत्र, पौत्र, धन-धान्य, पशु, रत्नादि सम्पत्ति और उत्तम भोग उसे प्रदान करते हैं।
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