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गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 48
तत्तत्क्षेत्रं समासाद्य स्नात्वाभ्यर्च्य गजाननम् । सकृद्गीतां पठन्भक्त्या ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥
उन-उन पुण्य क्षेत्रों में जाकर स्नानकर गणेशजी का पूजन कर एक बार भी भक्तिपूर्वक इस गीता का पाठ करने वाला ब्रह्मस्वरूप को प्राप्त हो जाता है।
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