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गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 43
न यज्ञैर्न व्रतैर्दानैर्नाग्निहोत्रैर्महाधनैः । न वेदैः सम्यगभ्यस्तैः सहाङ्गकैः ॥
न यज्ञ, न व्रत, न दान, न अग्निहोत्र, न महाधन, न सांगोपांग वेदों के उत्तम ज्ञान और अभ्यास,
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