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गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 41
यो गीतां सम्यगभ्यस्य ज्ञात्वा चार्थं गुरोर्मुखात् । कृत्वा पूजां गणेशस्य प्रत्यहं पठते तु यः ॥
जो इस गीता का भली प्रकार अभ्यास कर तथा गुरुमुख से इसका अर्थ जानकर गणेशजी की पूजा कर
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