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गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 38
त्यक्त्वा राज्यं कुटुम्बं च कान्तारं प्रययौ रयात् । उपदिष्टं यथा योगमास्थाय मुक्तिमाप्नवान् ॥
राज्य और कुटुम्ब को त्यागकर वेग से वह वन को चला गया और उपदेश किये गये योग में स्थित होकर मुक्त हो गया।
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