व्यास उवाच-
इति तस्य वचः श्रुत्वा प्रसन्नस्य महात्मनः ।
गणेशस्य वरेण्यः स चकार च यथोदितम् ॥
व्यासजी बोले - इस प्रकार प्रसन्नचित्त महात्मा गणेशजी के वचन सुनकर राजा वरेण्य ने उनके वचन के अनुसार आचरण किया ।
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