मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 35
इति ते कथितो राजन्प्रसादाद्योगौत्तमः । सांगोपांगः सविस्तारोऽनादिसिद्धो मया प्रिय ॥
प्रिय राजन्! इस प्रकार तुम्हारे स्नेह से मैंने अंग-उपांगसहित विस्तारपूर्वक अनादि सिद्धयोग का वर्णन किया, यह योग परमोत्तम है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें