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गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 32
नानावस्तुक्रयो भूमेः कर्षणं रक्षणं गवाम् । त्रिधा कर्माधिकारित्वं वैश्यकर्म समीरितम् ॥
अनेक प्रकार की वस्तुओं का क्रय-विक्रय, पृथ्वीकर्षण अर्थात् खेती आदि करना, गायों की रक्षा करना - ये तीन प्रकार के वैश्य के कर्म कहे गये हैं।
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