दार्ढ्यं शौर्यं च दाक्ष्यं च युद्धे पृष्ठाप्रदर्शनम् ।
शरण्यपालनं दानं धृतिस्तेजः स्वभावजम् ॥
दृढ़ता, शूरता, चतुरता, युद्ध से पलायन न करना, शरणागत की रक्षा, दान, धैर्य, स्वाभाविक तेज,
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।