अन्तर्बाह्येन्द्रियाणां च वश्यत्वमार्जवं क्षमा ।
नानातपांसि शौचं च द्विविधं ज्ञानमात्मनः ॥
बाह्य और अन्तः इन्द्रियों को वश में करना, सरलता, क्षमा, अनेक प्रकार के तप, पवित्रता, दोनों प्रकार (अन्वयव्यतिरेक) से आत्मा का ज्ञान,
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।