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गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 25
सर्वदा मोहकं स्वस्य सुखं तामसमीदृशम् । न तदस्ति यदेतैर्यन्मुक्तं स्यात्त्रिविधैर्गुणैः ॥
अपने को सदा मोह उत्पन्न करता हो, उसका नाम तामसी सुख है। ऐसा कोई भी प्राणी नहीं है, जो इन तीनों गुणों से मुक्त हो।
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