हालाहलमिवान्ते यद्राजसं सुखमीरितम् ।
तन्द्रिप्रमादसंभूतमालस्यप्रभवं च यत् ॥
अन्त में विष के समान फल दे, उसे राजसी सुख कहते हैं। जो तन्द्रा तथा प्रमाद से उत्पन्न हुआ हो, आलस्य से भरा हु हो तथा
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।