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गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 24
हालाहलमिवान्ते यद्राजसं सुखमीरितम् । तन्द्रिप्रमादसंभूतमालस्यप्रभवं च यत् ॥
अन्त में विष के समान फल दे, उसे राजसी सुख कहते हैं। जो तन्द्रा तथा प्रमाद से उत्पन्न हुआ हो, आलस्य से भरा हु हो तथा
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