सुखं च त्रिविधं राजन्दुःखं च क्रमतः शृणु ।
सात्त्विकं राजसं चैव तामसं च मयोच्यते ॥
हे राजन्! इसी प्रकार सुख-दुःख भी तीन प्रकार के हैं, वह तुम क्रम से सुनो, इनके भी सात्त्विक, राजस, तामस भेद हैं, उन्हें मैं कहता हूँ।
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