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गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 20
प्रमादाज्ञानसहितः परोच्छेदपरः शठः । अलसस्तर्कवान्यस्तु कर्तासौ तामसो मतः ॥
प्रमाद और अज्ञानयुक्त, दूसरों का नाश करने वाला दुष्ट, आलसी और जो कुतर्क करने वाला है, वह तामसी कर्ता कहा जाता है।
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