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गणेशगीता • अध्याय 11 • श्लोक 16
क्रियमाणं नृभिर्दम्भात्कर्म राजसमुच्यते । अनपेक्ष्य स्वशक्तिं यदर्थक्षयकरं च यत् ॥१
जिसको मनुष्य दम्भपूर्वक करते हैं, वह राजस कर्म कहलाता है और जो अपनी शक्ति के बाहर तथा अर्थ का क्षय करने वाला कर्म
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