सदम्भकर्मकर्तृत्वं स्पृहा च परवस्तुषु ।
अनेककामनावत्त्वं सर्वदाऽनृतभाषणम् ॥
पाखण्ड सहित कर्म करना, दूसरे की वस्तुओं को पाने की इच्छा, अनेक कामनायुक्त होना, सदा झूठ बोलना,
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।