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गणेशगीता • अध्याय 10 • श्लोक 8
मुनिश्रोत्रियविप्राणां तथा स्मृतिपुराणयोः । पाखण्डवाक्ये विश्वासः संगतिर्मलिनान्मनाम् ॥
देवता, मुनि, श्रोत्रिय, ब्राह्मण तथा स्मृति और पुराण की निन्दा करना, पाखण्ड - वाक्य में विश्वास, दुष्टों तथा मलिन पुरुषों की संगति करना।
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