अविश्वासः सतां वाक्येऽशुचित्वं कर्महीनता ।
निन्दकत्वं च वेदानां भक्तानामसुरद्विषाम् ॥
श्रेष्ठ पुरुषों के वाक्य में अविश्वास, अपवित्रता, कर्मों का न करना, वेद, भक्त,
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