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गणेशगीता • अध्याय 10 • श्लोक 22
शोषयन्तो निजं देहमन्तःस्थं मां दृढाग्रहाः । तामस्येतादृशी भक्तिर्नृणां सा निरयप्रदा ॥
दुराग्रहपूर्वक अपने शरीर और उसमें स्थित मुझे भी क्लेश पहुँचाते हैं, उनकी यह तामसी भक्ति नरक देने वाली है।
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