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गणेशगीता • अध्याय 10 • श्लोक 21
वेदेनाविहितं क्रूरं साहंकारं सदम्भकम् । भजन्ते प्रेतभूतादीन्कर्म कुर्वन्ति कामुकम् ॥
वेदविधान से रहित, क्रूर, अहंकार तथा दम्भसहित जो प्रेतभूतादि कों को भजते हैं और कामुक कर्म करते हैं तथा
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