हे राजन्! वह भक्ति भी सात्त्विकी, राजसी और तामसी - इन भेदों से तीन प्रकार की है, जिस भक्ति से देवताओं का भजन किया जाता है, वह कल्याणकारिणी सात्त्विकी भक्ति कही गयी है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।