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गणेशगीता • अध्याय 10 • श्लोक 18
तस्मादेतत्समुत्सृज्य दैवीं प्रकृतिमाश्रय । भक्तिं कुरु मदीयां त्वमनिशं दृढचेतसा ॥
इस कारण इस (तामसी प्रकृति) को छोड़कर दैवी प्रकृति का आश्रय करो और तुम दृढ़ चित्त से मेरी निरन्तर भक्ति करो।
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