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गणेशगीता • अध्याय 10 • श्लोक 13
दैवान्निःसृत्य नरकाज्जायन्ते भुवि कुब्जकाः । जात्यन्धाः पङ्गवो दीना हीनजातिषु ते नृप ॥
हे राजन्! कदाचित् दैववश नरक से निकलकर पृथ्वी में जन्म लेते हैं तो वे कुबड़े होते हैं या जन्मान्ध, लँगड़े, दीन और हीन जाति में जन्म लेते हैं।
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