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गणेशगीता • अध्याय 10 • श्लोक 11
पृथिव्यां स्वर्गलोके च परिवृत्य वसन्ति ते । मद्भक्तिरहिता लोका राक्षसीं प्रकृतिं श्रिताः ॥
पृथ्वी और स्वर्गलोक में ये सब गुण रहते हैं, जो लोग मेरी भक्ति से रहित हैं, वे ही राक्षसी प्रकृति को प्राप्त होते हैं।
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