पृथिव्यां स्वर्गलोके च परिवृत्य वसन्ति ते ।
मद्भक्तिरहिता लोका राक्षसीं प्रकृतिं श्रिताः ॥
पृथ्वी और स्वर्गलोक में ये सब गुण रहते हैं, जो लोग मेरी भक्ति से रहित हैं, वे ही राक्षसी प्रकृति को प्राप्त होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।