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गणेशगीता • अध्याय 10 • श्लोक 1
श्रीगजानन उवाच- दैव्यासुरी राक्षसी च प्रकृतिस्त्रिविधा नृणाम् । तासां फलानि चिन्हानि संक्षेपात्तेऽधुना ब्रुवे ॥
श्रीगणेशजी बोले - दैवी, आसुरी, राक्षसी - तीन प्रकार की मनुष्यों की प्रकृति होती है, उनके फल और चिह्न संक्षेप से अब तुम्हारे लिये वर्णन करता हूँ।
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