विरज्य विन्दति ब्रह्म विषयेषु सुबोधतः ।
अच्छेद्यं शस्त्रसंघातैरदाह्यमनलेन च ॥
तब यह प्राणी विषयों से जागकर और उनसे विरक्त हो परब्रह्म को जानते हैं, जो ब्रह्म शस्त्र समूहों से छेदन नहीं हो सक्ता अग्नि से दुग्ध नहीं हो सक्ता।
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