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गणेशगीता • अध्याय 1 • श्लोक 8
सर्वदा षड्रिकारेषु तानियं योजयेद्भृशम् ॥ हित्वाजापटलं जन्तुरनेकैर्जन्मभिः शनैः ॥
जो माया सदा कामक्रोधादि छः विकारों में इन प्राणियों को लगा देती है, योग से जब शनैः शनैः अनेक जन्म के माया के कपाट दूर हो जाते हैं
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